हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के विश्वविख्यात सिद्धपीठ बाबा बालकनाथजी दियोटसिद्ध मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई ड्रेस नीति लागू करने का फैसला लिया है। 13 जुलाई से चढ़ावे की गणना करने वाले सभी कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य होगा।
13 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था
मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी नई व्यवस्था उपायुक्त हमीरपुर एवं मंदिर ट्रस्ट की अध्यक्ष गंधर्वा राठौड़ के निर्देश पर लागू की जा रही है। इसके तहत चढ़ावे की गिनती करने वाले किसी भी कर्मचारी को जेब वाले कपड़े पहनकर ड्यूटी करने की अनुमति नहीं होगी। यह नई व्यवस्था 13 जुलाई से प्रभावी होगी।
पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया फैसला
मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि चढ़ावे की गणना पूरी पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ होना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और व्यवस्थित बनी रहे।
अयोध्या में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद बढ़ाई गई सतर्कता
मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रीरामजन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में सामने आए चढ़ावा चोरी के मामले के बाद विभिन्न मंदिरों में चढ़ावे की गणना व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में दियोटसिद्ध मंदिर ट्रस्ट ने भी यह नई ड्रेस नीति लागू करने का निर्णय लिया है।
सीसीटीवी निगरानी में होती है पूरी गणना प्रक्रिया
दियोटसिद्ध मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा बालकनाथजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में प्राप्त नकदी की गणना पहले से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, अधिकृत कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में की जाती है। अब इस प्रक्रिया में बिना जेब वाले कपड़े पहनने की अनिवार्यता भी जोड़ दी गई है।
लंबे समय से चल रहा था विचार-विमर्श
उपायुक्त ने बताया कि इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर लंबे समय से विचार-विमर्श किया जा रहा था। सभी पहलुओं पर मंथन के बाद अब इसे 13 जुलाई से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
